Friday, 2 August 2013

"Whose valued—work or leisure"- Inspirational story in Hindi


किसकी कीमत- मेहनत या आराम कि?
honesty and hard work is a base of  happy life 


एक बार कि बात है, एक गावं में बिरजू नाम का एक किसान रहता था, उसके पास दो बहुत मेहनती बैल थे, उनसे वो बहुत प्रेम करता था इसलिए वो उन्हें नाम से पुकारता था जो उसने स्वंय रखा था, एक बैल का नाम  उसने नंदी aur दुसरे का शिंगी रखा, वो rose उन्हें बड़े pyaar से हरीहरी दूब grass और चारा खिलाता था, एक बार दोनो बैल खेत जोत रहे थे अपने मालिक बिरजू के साथ, सभी बड़ी मेहनत से अपने-अपने work में लगे थे, खेत के पास ही मटरू नाम का बकरा बैठा था, वो नंदी aur शिंगी कि इतनी कड़ी मेहनत देख कर उनसे बोला-“ श्रीमान बैल जी! आपका जीवन भी कोई जीवन है, आपका मालिक आपसे कितनी बुरी तरह से काम लेता है,..मेरा मालिक तो मुझ से कोई काम नहीं लेता और साथ ही  दिन में 4-5 बार खूब खिलाता है, मैं तो बड़े आराम कि life गुजार रहा हूँ, पर आप लोगों को तो बड़ा कष्ट है...” बकरे मटरू कि बात सुन कर शिंगी aur नंदी दोनो बैल आपस में एक-दुसरे को देख कर बस मुस्कुरा दिए और मटरू कि बात को सुनी-अनसुनी करते हुए अपने job मे लगे रहे,

what is valued..life's up or end? 
शाम हुई तो बकरे मटरू का मालिक अपने एक friend के साथ वहां आया aur बकरे को दिखाते हुए बोला – “ अब ये खूब तगड़ा हो गया है, इसको अब काटा  जा सकता है.”
वही पे नंदी और शिंगी बैलो के मालिक ने बिरजू ने दोनो कि पीठ थपथपाई और बड़े pyaar से हरी-हरी दूब और चारा ला के खिलाया, अब दोनो बैल नंदी और शिंगी बकरे से बोले-“ कुछ समझ में आया...? मेहनत और आराम-फरमान के बीच का अंतर... अब बताओ कौन ख़ुशी के दिन गुजार रहा है हम या तुम..!
अब मटरू बकरे को पता चला कि इस संसार में केवल श्रम कि value है, आराम फरमाने कि नहीं. life का सुख आराम फरमाने में नहीं अपनी मेहनत से अपना और दूसरों का जीवन सवारने में है.  

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